एक बार एक औरत अपने गधे को एक ऋषि के पास लेकर गई और ऋषि से अपने गधे को घोड़ा बनाने का तरीक़ा बताने की याचना की। ऋषि भविष्यदृष्टा था। ऋषि ने कहा मैं इसे घोड़ा बनाने का तरीक़ा बता रहा हूँ, पर एक दिन ये घोड़ा बनकर भी मुझे ही दुल्लती मारेगा। और दस साल बाद ऋषि का कथन सत्य सिद्ध हुआ । अब ऋषि ने सोच लिया है कि फिर किसी गधे को घोड़ा होने का मार्ग नहीं बताना है। हालांकि संभव है कि गधा फिर भी घोड़ा बन जाए। पर तब दुल्लती खाने पर भी ऋषि को दुख नहीं होगा।
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चलने की अदा
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kartik
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दिखावा छोड़कर पैदल चलें शहरी भारत को अपने पैदलपथों को मुक्त करके पैदल चलना आरम्भ करना होगा। हमेशा की तरह, देश के संरचनात्मक ढांचे के निर्माण तथा सुधार पर खरबों रुपये खर्च करने का दिखावा करने वाला भारत एक चीज को नज़रअंदाज कर रहा हैः पैदलपथ अथवा पटड़ियां बिछाना। प्रत्येक स्तर पर सरकारी नीतियां, भारत को मोटर वाहनों पर आधारित देश बनाने पर तुली हुई हैं। पैदल चलने के लिए कोई राह नहीं है। साइकल-लेनों की बात छोड़ दीजिए, शहर दर शहर और नगर दर नगर पटड़ियों और पैदलपथों (फुटपाथों) पर सामान बेचनेवालों, वाहनों, गड्ढों, खुली नालियों ने कब्जा कर लिया है या फिर ये घोर नजरअंदाजी, दुर्दशा तथा लापरवाही का शिकार हो चुके हैं। तेज गति से वाहन चलाना आज की जीवनशैली बन चुकी है। हर कोई नई गाड़ियों और नवीनतम सड़कों की बात करता है। वाहनों की संख्या असीमित रूप से बढ़ती जा रही है। कितने भी उड़ानपुल और पारपथ तथा ओवरब्रिज बनाए जाएं इस समस्या का हल नहीं होगा। केवल कुछ मील लम्बी नहीं बल्कि कई दिनों तक के ट्रैफिक ...
Problems arising during Hindi Translation of Scientific Terminology/वैज्ञानिक शब्दावली के हिंदी में अनुवाद के दौरान पेश आने वाली समस्या
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अकसर अनुवाद करते समय एक समस्या सामने आती है कि क्या वैज्ञानिक शब्दावली को हिंदी में अनुवाद करना चाहिए या नहीं अर्थात् उसी भाषा के शब्द को हिंदी में (ट्रांसलिटरेट करके) लिख देना चाहिए , जिस भाषा में उस विषय पर मूल सिद्धान्त दिया या खोज की गई थी। जैसे क्या इलैक्ट्रॉन को इलैक्ट्रॉन ही लिख देना चाहिए या इसे कोई हिंदी का सरल शब्द दिया जाए जैसे कि ‘ ऋणात्मक कण ’ या ऐसा ही कुछ और जिससे इसके पढ़ते ही इस कण के बारे में सहज अनुभूति पाठक अपनी भाषा में अपने मस्तिष्क में कर सके। पंजाबी के साहित्यकार श्री कुलदीप सिंह धीर मानते हैं कि पंजाबी में सांईस पढ़ाते समय वैज्ञानिक शब्दावली का पंजाबी में अनुवाद करने का कोई लाभ नहीं है। क्या सल्फर को गंधक नहीं लिखना चाहिए ? क्या थ्योरी ऑफ रिलेटिववीटी का भारतीय भाषा में अनुवाद नहीं करना चाहिए। यह एक तथ्य है कि हम अपनी भाषा में चीजों को बेहतर ढ़ंग से सहज ज्ञान के माध्यम से सहजता से समझ लेते हैं। मुश्किल ये है कि पश्चिमी विज्ञान अभी चरण वार खोज की दिशा में है, जबकि भारतीय विज्ञान को कहानियों में समेट कर तब गुरुकलों में पढ़ाया जाता था जब लिखने के साधन बहुत म...
कॉरपॉरेट जगत में भविष्य के नीति - निर्माता LEADER OF FUTURE
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भविष्य की नीति निर्माता आज की पीढ़ी के युवा क्रियाशील, कैरियर के प्रति जागरुक हैं तथा अपने भविष्य के लिए पहले से योजना बनाकर रखते हैं। वर्तमान पीढ़ी को पता है कि कम्पनियों को भविष्य के लिए रणनीतिकार - नेतृत्व विकसित करने हेतु उनकी आवश्यकता है और ऐसी कम्पनी के साथ ये युवा काम करना पसंद करते हैं जिसके लक्ष्य उनके स्वयं के लक्ष्यों के साथ मेल खाते हैं। अनिश्चित तथा परिवर्तनशील समय में कम्पनी के भीतर नेतृत्व विकसित किया जाना आवश्यक है। ऐसे समय में , कम्पनियों को केवल योग्य नेतृत्व ही उबार सकता है। ज्यादातर कम्पनियां नेतृत्व संस्कृति को विकसित करने पर ध्यान नहीं देती। इसलिए कम्पनी के भीतर उद्यमिता को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है तथा कम्पनियों को ऐसी संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता है जिसमें संगठन के अंदर से ही नेतृत्व उभरकर आए। अत्यधिक पदसोपान वाले ढांचागत परिवेश में कार्यरत रही पुरानी पीढ़ी के विपरीत, नई पीढ़ी के युवा अनेक प्रकार से काफी नई सोचविचार वाले तथा सृजनात्मक हैं। इसलिए वे चाहते हैं कि उनका काम अर्थपूर्ण हो। उनके लिए व्यैक्तिक पहचान अ...
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यमदूतों की गलतीः दुर्गी की कहानी बरसों पहले की बात है, एक थे दुर्गी जिनका वास्तविक नाम तो दुर्गा प्रसाद था। इन्हें लेने के लिए यमदूत आए थे परन्तु ये अपनी चालाकी से उनके चंगुल से बच निकले। कुछ इनकी चालाकी थी कुछ यम के उन कारिंदों की नरमदिली। दुर्गी निर्धन व्यक्ति थे। किसी फैक्ट्री में काम करके गुजारा करते थे। घर में दो ही प्राणी थे एक ये और एक इनकी पत्नी। छोटा - सा घर था। रोहतक में सैनी पुरा समाप्त होने के बाद , कई मोहल्लों का सांझा तालाब (जोहड़) था। उसी जोहड़ के निकट ये निर्धन दम्पति रहते थे। यह एक गंदी - सी जगह थी। आसपास के इलाके के अपेक्षाकृत सम्पन्न लोगों के घरों की निकासी का गंदा पानी इन गरीबों के घरों के पास से गुजरते एक नाले के रूप में इसी जोहड़ में जा गिरता था। ऐसे ही एक अपेक्षाकृत सम्पन्न परिवार की डेयरी में, दुर्गी से रात में सोने की जगह के बदले में चौकीदारी करायी जाती थी। गरीब का हर कोई लाभ उठाता है। लगभग फ्री का चौकीदार। एक रात भोजन के बाद, दुर्गी जी सोने के लिए डेयरी में आए और सो गए। डेयरी के मालिक का हाल ही में विवाह हुआ था। इसलिए मालिक डेयरी से दूर अपने घर सोने चला...
अपना बिज़नेस कैसे शुरु करें, How to start your own business in Hindi
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अपना बिजनेस कैसे शुरू करें आज जब आप बड़ी – बड़ी कंपनियों , उद्योगों , कॉर्पोरेट को देखते हैं तो सोचते होंगे कि ये कैसे शुरू हुई। आप सोचते होंगे कि क्या मैं ऐसी कंपनी बना सकती/ता हूँ। आपको जानकार हैरानी होगी ये बड़ी – बड़ी कंपनियाँ भी किसी गैराज , बाड़े या एक कमरे के स्थान से शुरू हुई थी। टाटा , गोदरेज , अमेज़न , बिरला , वीडियोकॉन , गूगल , अलीबाबाडॉटकॉम , रिलायंस , ये एक दिन में नहीं बनीं । इस मंजिल तक पहुँचने में इन्हें समय के साथ , सही मात्रा में धन , वर्कर , भाग्य और मेहनत मिली थी। जब ये उद्योग शुरू हुए थे तो इन के पास कुछ नहीं था , सिवाए एक विचार अथवा योजना के । परंतु ये वो योजनाएँ हैं जिन पर अमल किया गया। जिन्हें मूर्त्त रूप में साकार करने के लिए ठोस प्रयास किया गया । यदि आप भी एक नया व्यवसाय आरंभ करना चाहते हैं तो सदा स्मरण रखें कि महत्वपूर्ण ये नहीं है कि आप कहाँ से शुरुआत करते हैं बल्कि महत्वपूर्ण ये है कि आपकी शुरुआत का अंतिम परिणाम क्या निकलता है । ...
दक्षिण भारतीय मंदिरों की आर्थिक गतिविधियां
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मध्यकालीन दक्षिण भारतीय मन्दिर की आर्थिक गतिविधियां अठाहरवीं और उन्नीसवीं सदी में अंग्रेजों के नियंत्रण से पूर्व दक्षिण भारत की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था में मध्यकालीन दक्षिण भारतीय हिन्दू मन्दिरों का अत्यधिक आर्थिक महत्व था। वर्तमान अध्ययन आन्ध्र प्रदेश के वर्तमान चित्तूर जिले के तिरूपति में स्थित , और दक्षिण भारतीय मन्दिरों में सबसे महत्वपूर्ण , एक तीर्थ-मन्दिर श्री वेंकटेश्वर के लगभग 100 शिलालेखों के उद्धरणों पर किए गए कार्य का परिणाम है। ये शिलालेख मुख्यतया नौवीं से सोलहवीं शताब्दियों के हैं , इस प्रकार ये किसी भारतीय मन्दिर की मध्यकालीन सामग्री का सबसे उम्दा संग्रह हैं। तिरूपति के शिलालेखों का संबंध निश्चित रूप से भूमि और धन के धर्मदान से है और इसीलिए यह धार्मिक दान में प्राप्त निधियों के रूप में मन्दिर के पास रखी गई भूमि और धन की प्रकृति एवं उपयोगिता के विश्लेषण के लिए बहुत ही उपयोगी है। इस सामग्री से तमिल देश के अन्य हिस्सों से कर्मकाण्डों के रूपों को अपनाने के कारण मन्दिर के कर्...