अपना बिज़नेस कैसे शुरु करें, How to start your own business in Hindi
अपना
बिजनेस कैसे शुरू करें
आज
जब आप बड़ी – बड़ी कंपनियों, उद्योगों, कॉर्पोरेट को देखते हैं तो सोचते होंगे कि ये कैसे शुरू हुई। आप सोचते
होंगे कि क्या मैं ऐसी कंपनी बना सकती/ता हूँ। आपको जानकार हैरानी होगी ये बड़ी –
बड़ी कंपनियाँ भी किसी गैराज, बाड़े या एक कमरे के स्थान से
शुरू हुई थी। टाटा, गोदरेज, अमेज़न, बिरला, वीडियोकॉन, गूगल, अलीबाबाडॉटकॉम, रिलायंस, ये
एक दिन में नहीं बनीं । इस मंजिल तक पहुँचने में इन्हें समय के साथ, सही मात्रा में धन, वर्कर,
भाग्य और मेहनत मिली थी। जब ये उद्योग शुरू हुए थे तो इन के पास कुछ नहीं था, सिवाए एक विचार अथवा योजना के । परंतु ये वो योजनाएँ हैं जिन पर अमल किया
गया। जिन्हें मूर्त्त रूप में साकार करने के लिए ठोस प्रयास किया गया ।
यदि आप भी एक नया व्यवसाय आरंभ करना
चाहते हैं तो सदा स्मरण रखें कि महत्वपूर्ण ये नहीं है कि आप कहाँ से शुरुआत करते
हैं बल्कि महत्वपूर्ण ये है कि आपकी शुरुआत का अंतिम परिणाम क्या निकलता है ।
नया कार्य शुरू करने वालों के लिए कुछ
मार्गनिर्देश :
1.
सही समय : एक सफल उद्यमी बनने के लिए या एक नया उद्योग
शुरू करने के लिए सही समय पर शुरुआत करना अथवा अपने विचार / योजना को अमलीजामा
पहनाना अत्यावश्यक है। यदि आप हीलहवाले और योजना निर्माण (हवाई किले) में उलझे
रहेंगे तो उद्यम की शुरुआत कभी नहीं होगी। इसलिए आज ही अपने विचार पर कार्य करना
शुरू कर दें। अन्यथा विचारों के पंख होते हैं,
आपका विचार किसी और के मस्तिष्क में पहुँच जाएगा और वो इसे आपसे पहले अंजाम तक ले
जाएगा और आप कहेंगे यही विचार तो मेरे मन में भी आया था परंतु मैंने क्रियान्वित
नहीं किया । पछतावा! देरी करने से और कुछ हाथ नहीं आएगा। याद रखें! जब यात्रा शुरू होगी तो कारवां बनता जाएगा।
2.
अवसर लागत : एक समय पर आप अपने
प्रयास सही मायने में एक ही कार्य को समर्पित कर सकते हैं अर्थात दूसरे कार्य से आपको
ध्यान हटाना पड़ता है ।इस प्रकार आपने जिस कार्य से आपने ध्यान हटाया, वह पहले वाले कार्य जिसे आप करेंगे उसकी अवसर लागत होता है। सही समय पर
कार्य शुरू न करने से आपको कई कार्य छोडने पड़ेंगे, ऊहा पोह
में समय निकाल जाएगा। एक सफल कार्य को अंजाम देने से आपको जो (आंतरिक ) प्रोत्साहन
मिलना था वो नहीं मिलेगा। बाजार के हालात बदल जाएंगे, आपकी
परिस्थितियाँ बदल जाएंगी। ये सभी, कोई कार्य शुरू करने की
अवसर लागत हैं । अक्सर ये देरी के कारण बढ़ जाती हैं ।
3.
योजना बनाना
: किसी भी कार्य को यदि पूर्व योजना के आधार पर शुरू किया जाए तो कार्य के अनुसार
स्वयं और परिस्थितियों को नियंत्रित करने की शक्ति प्राप्त होती है। स्व-नियंत्रण
और अनुशासन व्यवसाय में अत्यावश्यक है । जब आप योजना की शुरुआत करते हैं तो एक
लक्ष्य निर्धारित करते हैं। इस लक्ष्य को प्राप्त करना ही व्यवसाय करना है। ये
लक्ष्य मार्केट या सेल्स से संबंधित हो सकता है।
अथवा व्यवसाय शुरू करने से ही संबंधित हो सकता है । उदाहरण के लिए मान
लीजिए आप एक फैशन – बुटिक शॉप खोलना चाहते हैं तो लक्ष्य स्थान (दुकान) किराए पर
लेने या खरीदने का होगा। लक्ष्य लागत को नियंत्रित करने या कब तक काम शुरू करना है
अर्थात समय निर्धारण से संबंधित हो सकता है। कि आप कितनी लागत से, किस दिनांक तक अथवा किस महीने में कार्य शुरू कर देंगे। अब इस लक्ष्य को
पूरा करने की ज़िम्मेदारी आपकी होगी और आप इस ज़िम्मेदारी को दूसरों पर नहीं थोप
सकते, ये कार्य बिना रूके आप ही को पूरा करना होगा। इसी
प्रकार के छोटे – छोटे लक्ष्य निर्धारित / पूरे करने की योजनाएँ बनाकर, स्वयं इनका मूल्यांकन करके ( कि लक्ष्य कहाँ तक पूरा हुआ), आपको लक्ष्य को अंजाम तक पहुंचाना होगा। एक लक्ष्य हासिल करने के बाद, उसके आगे का लक्ष्य प्राप्त करने का प्रयास शुरू हो जाएगा। ये ध्यान रखने
वाली बात है कि लक्ष्य निर्धारण, लक्ष्य को पूरा करने की
योजना बनाना, योजना पर कार्य करना और किए गए कार्य का
मूल्यांकन करना ये सब कार्य साथ – साथ चलते हैं। आप अपनी सूझबूझ और मनोभावों पर
नियंत्रण रखते हुए आगे बढ़ते हैं । हर दिन कार्य करते हुए सीखते हैं। किसी भूल –
भुलैया की तरह हर दिन नए अवसर, नई समस्याओं के द्वार खुलेंगे
और आपको हातिमताई की कहानी के नायक की तरह इन द्वारों में घुस कर समस्याओं को
सुलझाना होगा। बिना अनुशासन और योजना के ये सब करना संभव नहीं होगा।
4.
सामाजिक व्यवहार
कुशलता : एक उद्यमी के रूप में आप अपने काम
के राजा हैं। आपको ही अपने इस राज्य (व्यवसाय) की व्यवस्था देखनी है। इस व्यवस्था
अथवा प्रबंधन में आपको भांति – भांति के मनोभावो, तौर तरीकों वाले लोगों से पाला पड़ेगा। आपकी टीम के सदस्यों और ग्राहकों
से निपटने के लिए सामाजिक व्यवहार की कुशलता बहुत काम आएगी। समय के साथ व्यावहारिक रूप से,
अलग – अलग प्रकार की बुद्धि वाले लोगों से निपटते हुए आपकी व्यवहार कुशलता में
निखार आता जाएगा और किस प्रकार के व्यक्ति को किस प्रकार हैंडल करना है, इसकी समझ विकसित हो जाएगी। इसी दौरान, नए संपर्कों
/ संबंधों का नेटवर्क बनाते जाएँ। आपको अपने व्यवसाय से संबंधित व्यक्तियों के साथ
बने नए – पुराने संपर्कों को बनाए रखना भी अत्यावश्यक है। वास्तव में व्यवसाय का
दूसरा नाम ही संबंध है। ग्राहक और दुकानदार का संबंध,
आपूर्तिकर्ताओं से संबंध, सरकारी एजेंसियों से संबंध, टीम के सदस्यों के बीच संबंध, मांग और आपूर्ति का
संबंध, डिस्प्ले /
विज्ञापन और सेल्स (बिक्री) का संबंध आदि। याद रखें ! किसी व्यापार की सफलता इसके
विभिन्न हितधारकों के आपसी लाभदायक संबंधों पर निर्भर करती है।
5.
पूंजी : कोई भी व्यापार शुरू करने के लिए पूंजी की आवश्यकता
होती है। व्यवसाय शुरू करने से पहले ही पूंजी जुटाने हेतु विभिन्न प्रकार की
लागतों का आकलन करना आवश्यक है। पूंजी
जुटाने के कई तरीके हैं। स्वयं के पास उपलब्ध धन लगाया जा सकता है। सरकारी योजनाओं के अंतर्गत मिलने वाले लोन /
आर्थिक सहायता का लाभ उठाया जा सकता है। अथवा निवेशक खोजना पड़ता है। आपको अपनी
जरूरत के अनुसार विकल्प पर निर्णय लेना पड़ेगा। छोटे स्तर पर कार्य शुरू करके भी कम
पूंजी से काम चलाया जा सकता है।
6.
व्यवसायिक वातावरण
: एक
व्यवसायी अपने व्यवसाय से संबंधित बाज़ार के वातावरण को परखता है, यथा मांग कितनी है, किस प्रकार (वेरियंट) के
प्रॉडक्ट/सेवा की मांग है। बाज़ार के ट्रेंड को समझना है। जो व्यवसाय करना चाहते
हैं, उसके सामाजिक, आर्थिक कानूनी पहलू
कौन से हैं और इनसे कैसे निपटना है; इन विषयों पर योजना
बनानी पड़ सकती है। एक बार व्यवसाय शुरू करने पर आपको अपनी योजना बदलनी भी पड़ सकती
है। हो सकता है, बिजनेस ही बदलना पड़ जाए।
और
अंत में :- बाज़ार में हजारों उत्पाद आते और
व्यवसाय शुरू होते हैं, कुछ ही सफल होते
हैं। अधिकतर असफल होते हैं। हमें असफलताएँ बहुत कुछ सीखा जाती हैं। परंतु इरादे
मजबूत हों तो सफलता मिल ही जाती है। अपनी पसंद का व्यवसाय चुनने के लिए अपनी मूल
प्रवृति, विशेषता को पहचानें और हो सके तो उसी के अनुसार
व्यवसाय चुनें, फिर जोश के साथ लग जाएँ अपना सपना पूरा करने में।
आवश्यक हो तो संबंधित क्षेत्र / व्यवसाय में आवश्यक प्रशिक्षण भी ले लेना चाहिए।
आवश्यक नहीं कि प्रशिक्षण किसी बहुत बड़े संस्थान से ही लिया जाए। पहले से कार्यरत
व्यवसायी से सलाह मशवरा भी काम आता है। किसी कार्यरत व्यवसायी के पास काम करते हुए
भी काम को सीखा जा सकता है। अपनी जरूरत और साधनों / संसाधनों की उपलब्धता के
अनुसार विकल्प का चयन करें। शुभकामनाओं सहित !
कार्तिक
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