चलने की अदा
दिखावा छोड़कर पैदल चलें
शहरी भारत को अपने
पैदलपथों को मुक्त करके पैदल चलना आरम्भ करना होगा।
हमेशा की तरह, देश के संरचनात्मक ढांचे के
निर्माण तथा सुधार पर खरबों रुपये खर्च करने का दिखावा करने वाला भारत एक चीज को
नज़रअंदाज कर रहा हैः पैदलपथ अथवा पटड़ियां बिछाना।
प्रत्येक स्तर पर
सरकारी नीतियां, भारत को मोटर वाहनों पर आधारित देश बनाने पर तुली हुई हैं। पैदल
चलने के लिए कोई राह नहीं है। साइकल-लेनों की बात छोड़ दीजिए, शहर दर शहर और नगर
दर नगर पटड़ियों और पैदलपथों (फुटपाथों) पर सामान बेचनेवालों, वाहनों, गड्ढों,
खुली नालियों ने कब्जा कर लिया है या फिर ये घोर नजरअंदाजी, दुर्दशा तथा लापरवाही
का शिकार हो चुके हैं।
तेज गति से वाहन चलाना आज की जीवनशैली बन
चुकी है। हर कोई नई गाड़ियों और नवीनतम सड़कों की बात करता है। वाहनों की संख्या
असीमित रूप से बढ़ती जा रही है। कितने भी उड़ानपुल और पारपथ तथा ओवरब्रिज बनाए
जाएं इस समस्या का हल नहीं होगा। केवल कुछ मील लम्बी नहीं बल्कि कई दिनों तक के
ट्रैफिक में फंसने पर होने वाली चिड़चिड़ाहट के लिए तैयार रहें।
पश्चिमी
देशों में छोटी दूरियों पर आवागमन के लिए पैदल चलने को अब सर्वोत्तम माना जा रहा
है। भारत में भी पैदल चलने और साइकिल चलाने को लेकर उत्साह हो इसका प्रयास किया
जाना जरूरी बन चुका है। दुनिया के सर्वोत्तम शहरों में पैदल चलने के अभियान चल रहे
हैं।
हम लोग एक गतिमान राष्ट्र के स्थान पर,
फालतु की बातें करनेवाला देश बन चुके हैं, हॉर्न पर हॉर्न बजाते हुए मोबाइल पर बात
करते रहते हैं। यदि कोई पैदल चलना चाहे तो फुटपाथ की कमी के चलते एक मील भी पैदल
नहीं चल सकता, इसलिए सब्जी या किराणा का सामान खरीदने के लिए भी मजबूरी में गाड़ी से
जाना पड़ता है। कुछ दशक पहले तक, भारतीय लोग पैदल चलना पसंद करते थे। इसलिए भी क्योंकि
कोई और विकल्प न होने की विवशता थी।
पैदल चलना महत्व की बात है क्योंकि इससे
कई सारी उन बातों का लाभ होता है जिन्हें हम रोजाना के जीवन में चाहते हैः हेल्थ
एवं फिटनेस, पैदल मार्ग में तरह-तरह के दृश्य, गलियों से जुड़ाव, सामुदायिक
सद्भावना और स्थान के साथ भी अपनेपन की भावना। यदि पैदल चलने को उपयोगी,
सुविधाजनक, सुरक्षित माहौल मिले तो अन्य कई प्रकार से इसके पर्यावरण के लिए
लाभदायक होने की संभावना भी है। लोग सेहतमंद और पहले से अधिक खुश भी रहेंगे। जरुरत
की हर वस्तु निकट ही मिलने पर ईंधन खाने वाले कम वाहन, कम प्रदूषण, अधिक वाणिज्यिक
गतिविधियां, और प्रॉपर्टी की उच्च कीमतें होंगी।
भारत को
मोटरचालित परिवहन व्यवस्था की जितनी जरुरत है उतना ही नागरिकों की सेहत तथा इसकी
सड़कों को भीड़ से मुक्त करने के लिए, साइकल चलाने या पैदल आवागमन की है। विश्व
स्वास्थ्य संगठन के साथ-साथ अन्य संस्थानों ने पैदल चलने को जीवनपर्यन्त स्वास्थ्य
के लिए निर्णायक घोषित किया है। डिमेंसिया से लेकर डीजेन्रेटिव सभी बिमारियों का
इलाज इससे संभव है। पैदल सैर करना और
साइकिल चलाना दोनों के लिए राष्ट्रीय प्राथमिकता के आधार पर योजनाएं बनाना अत्यावश्यक
है।
लाखों वर्षों में मानव ने पैदल चलने की अदा
को सीखा है क्या कुछ सौ वर्षों की मोटर संस्कृति के कारण, हमें इसे यूंही खत्म
होने देना चाहिए। चलने की अदा पर कवि फिर कैसे कविताओं की रचना करेगा।
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