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प्रिय मित्रों, मेडिकल क्लेम, लिव ईनकैसमैंट आदि के डाक विभाग के तैयार द्विभाषी फॉर्म मेरे पास उपलब्ध हैं।                                                                          डाक विभाग Department of Posts मुख्य पोस्टमास्टर जनरल Chief Postmaster General ……………….. सर्किल , …………………. ……………. Circle, …………………….. सेवा में, To                                                                                ...

manthan

  बोनसाई क्या है: बोनसाई विशाल वृक्षों को अत्यंत सीमित स्थान में पनपाने की कला है ये बोनसाई एक नज़र में लुभावने लग सकते हैं, पर यह प्रकृति के विरुद्ध उठाया गया कदम ही है. जब वृक्ष पौध-स्वरूप में होता है, तभी उसकी  
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हिंदी केवल भाषा ही नहीं वरन सार्वभौमिक -राष्ट्र की संस्कृति को अपने आप में समेटने की चेतना है।                                                                               चाय                                                                                            तीन की चाय,                                                                           साढ़े दस की चाय,   ...

अपना बिज़नेस कैसे शुरु करें, How to start your own business in Hindi

अपना बिजनेस कैसे शुरू करें आज जब आप बड़ी – बड़ी कंपनियों , उद्योगों , कॉर्पोरेट को देखते हैं तो सोचते होंगे कि ये कैसे शुरू हुई। आप सोचते होंगे कि क्या मैं ऐसी कंपनी बना सकती/ता हूँ। आपको जानकार हैरानी होगी ये बड़ी – बड़ी कंपनियाँ भी किसी गैराज , बाड़े या एक कमरे के स्थान से शुरू हुई थी। टाटा , गोदरेज , अमेज़न , बिरला , वीडियोकॉन , गूगल , अलीबाबाडॉटकॉम , रिलायंस , ये एक दिन में नहीं बनीं । इस मंजिल तक पहुँचने में इन्हें समय के साथ , सही मात्रा में धन , वर्कर , भाग्य और मेहनत मिली थी। जब ये उद्योग शुरू हुए थे तो इन के पास कुछ नहीं था , सिवाए एक विचार अथवा योजना के । परंतु ये वो योजनाएँ हैं जिन पर अमल किया गया। जिन्हें मूर्त्त रूप में साकार करने के लिए ठोस प्रयास किया गया ।             यदि आप भी एक नया व्यवसाय आरंभ करना चाहते हैं तो सदा स्मरण रखें कि महत्वपूर्ण ये नहीं है कि आप कहाँ से शुरुआत करते हैं बल्कि महत्वपूर्ण ये है कि आपकी शुरुआत का अंतिम परिणाम क्या निकलता है ।        ...

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सौ बार जनमें, सौ बार फ़ना हुए, आयेंगें जायेंगें और कितनी बार! ज़माने में क्या ताकत जो हमको हरा देता , तुमी बेवफा थे हर बार ! 

दक्षिण भारतीय मंदिरों की आर्थिक गतिविधियां

मध्‍यकालीन दक्षिण भारतीय मन्दिर की आर्थिक गतिविधियां       अठाहरवीं और उन्‍नीसवीं सदी में अंग्रेजों के नियंत्रण से पूर्व दक्षिण भारत की कृषि प्रधान अर्थव्‍यवस्‍था में मध्‍यकालीन दक्षिण भारतीय हिन्‍दू मन्दिरों का अत्‍यधिक आर्थिक महत्‍व था।       वर्तमान अध्‍ययन आन्‍ध्र प्रदेश के वर्तमान चित्‍तूर जिले के तिरूपति में स्थित ,  और दक्षिण भारतीय मन्दिरों में सबसे महत्‍वपूर्ण , एक तीर्थ-मन्दिर श्री वेंकटेश्‍वर के लगभग 100 शिलालेखों के उद्धरणों पर किए गए कार्य का परिणाम है। ये शिलालेख मुख्‍यतया नौवीं से सोलहवीं शताब्दियों के हैं , इस प्रकार ये किसी भारतीय मन्दिर की मध्‍यकालीन सामग्री का सबसे उम्‍दा संग्रह हैं। तिरूपति के शिलालेखों का संबंध निश्चित रूप से भूमि और धन के धर्मदान से है और इसीलिए यह धार्मिक दान में प्राप्‍त निधियों के रूप में मन्दिर के पास रखी गई भूमि और धन की प्रकृति एवं उपयोगिता के विश्‍लेषण के लिए बहुत ही उपयोगी है। इस सामग्री से तमिल देश के अन्‍य हिस्‍सों से कर्मकाण्‍डों के रूपों को अपनाने के कारण मन्दिर के कर्...