Posts

Showing posts from May, 2021
Image
                                                                                                                                                                                                                 (1994) आज इंसा की आँख का पानी मर गया सुना है के फिंजा में हिंसा का रंग भर गया ‘ तन्हा ’ समाज काफी प्रगतिशील हो गया परिवार ‘ चोली के पीछे ’ देखने के काबील हो गया ये तो आगाज है प्रगति का अंजाम क्या होगा आज ये हाल है भारतवर्ष का तो कल क्या होगा सम्भालना ह...

उल्फत - एक गज़लनुमा गीत

Image
  उल्फत जीवन में ना साथ तुम्हारा ये उल्फत को ना होगा गवारा भटक जाउँ जीवन की राह से ढूंढता हुआ तुम्हें हो जाउँ आवारा तुमको भी कैसे होगा ये गवारा कहा है किसी ने इश्क पर जोर नहीं है मुझे भी इस बात का यकीं जीना मरना होगा साथ हमारा तुम्हारा जीवन में न हो साथ तुम्हारा ये उल्फत को ना होगा गवारा   (मेरी मोहब्बत में ही कशिश न थी वर्ना नहीं तो क्या तुम बेवफा थे)

आँख - ग़ज़लनुमा एक गीत

Image
  आँख क्या खबर थी इस तरह तूं बेवफा होगी छोड़ दोगी साथ मोहब्बत भरा तोड़ दोगी दिल उल्फत भरा इस तरह मोहब्बत रुसवा होगी (क्या खबर थी)-2 इस तरह तूं बेवफा होगी होश आया तो पता चला मुझको आशिकी थी ही नहीं शरारत भर थी क्या खबर थी इस तरह तूं बेवफा होगी फिर इस तरह कभी मुलाकात होगी आँख मिलेगी और मुस्करा दोगी (क्या खबर थी)-2 इस तरह तूं बेवफा होगी बहुत समझाया दिल को ज़ख्म भरा ही नहीं सोचा ही नहीं तूने क्या हालत मेरी होगी क्या खबर थी इस तरह तूं बेवफा होगी

मंजिल - एक ग़ज़लनूमा गीत

  मंजिल जरा आगे से हट जाए जमाना तो मैं देखूं कहाँ है मयख़ाना खूब लुटाई है दौलत मोहब्बत की मगर खाली नहीं होता ख़ज़ाना कहते हुए दम घटु रहा है कैसे कहूँ ग़ज़ल आशिकाना जरा आगे से हट जाए जमाना ना मंजिल है कोई ना पता है मुझे कहाँ है जाना जरा आगे से हट जाए जमाना बाद तेरे कौन सिखाएगा जीना जाते जाते हमें ये बता जाना तुम्हीं से सीखा है मुस्कराना बाद तेरे कौन सिखाएगा रोना जाते जाते हमें ये समझा जाना वक्त मिले तो, कभी ... दिलासा देने हमें, आ जाना जब जरा आगे से हट जाए जमाना