(1994) आज इंसा की आँख का पानी मर गया सुना है के फिंजा में हिंसा का रंग भर गया ‘ तन्हा ’ समाज काफी प्रगतिशील हो गया परिवार ‘ चोली के पीछे ’ देखने के काबील हो गया ये तो आगाज है प्रगति का अंजाम क्या होगा आज ये हाल है भारतवर्ष का तो कल क्या होगा सम्भालना ह...