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Showing posts from April, 2021

तन्हाई - एक गीत

  तन्हाई तुमने हमको भुला दिया तो कोई गम नहीं तुम ना सही जहाँ में हंसी नजारे तो कोई कम नहीं तुमने हमको भुला दिया तो कोई गम नहीं तुम बिन जी लेंगे हम बहाने तो कोई कम नहीं तुमने हमको भुला दिया तो कोई गम नहीं एक अरमां जला के गए हो मेरा नए सपने सजा लूंगा मैं, सपने तो कोई कम नहीं तुमने हमको भुला दिया तो कोई गम नहीं तिनके बिखरा के गए हो आशियां के मेरे जोड़ लूंगा मैं इनको, टुकड़े तो कोई कम नहीं तुमने हमको भुला दिया तो कोई गम नहीं रोशनी कम ना होगी गर एक ‘ तन्हा ’ सितारा टूट भी गया आसमां में सितारे तो कोई कम नहीं तुमने हमको भुला दिया ......

बेगैरत - सा पंछी (एक कविता)

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                                 बेगैरत-सा पंछी अभिमानशून्य, बेगैरत-सा वो पंछी   लौट आता बार बार उसी डाल पर जिस डाल के अपनों से धकियाया जाता रहा लौट आता बार बार उसी डाल पर जिस डाल के घोंसले से गिराया जाता रहा जबकि खुद के पंख-भी आए न थे कौवा-कौवी पाल लेते होंगे कोयल के अभिमानशून्य, बेगैरत-सा वो पंछी, पुष्पित-पल्लवित हुआ, घोंसला भी बनाया और, गैरत ललकारती रही उसकी   कि न लौट के जा उसी डाल पर होता रहा अपमानित बार बार, पर जन्मस्थली का मोह छूटा नहीं अभिमानशून्य, बेगैरत-सा वो पंछी मान अपमान सोचता नहीं कभी उस डाल के पंछी ललकारते सभी हमारे बिना रह नहीं पाएगा तूं कभी संगी का भी अपमान सहता क्या कोई कभी चुनौती तुम्हारी स्वीकार है अभी अकेला ही चलता रहा कब से, चलूंगा आगे-भी

मुसाफिर / यात्री / The Traveller /पथिक एक कविता

  मुसाफिर मुसाफिर हैं सभी, तुम भी और हम भी, होगी कभी न कभी सफर में मुलाकात भी, जाने कितनी है जिंदगी, होगी एक रात-आखरी भी, कल न होंगे, नहीं कोई इसका गिला भी, पर रहेगा यादों का एक सिलसिला भी, जो मिले हैं लम्हें, चल हंस कर बिता लें अभी, जाने क्या फैसला हो वक्त का भी, कौन जाने पैगाम आ जाए, जाम के बजाय आखरी शाम आ जाए, हम खोजा करते हैं मुलाकात के बहाने भी, कि काम आ जाए किसी के ये जिंदगी भी, एक दिन तो छोड़ना होगा ये मकां, चुकाना होगा किराया भी, जो लेना है ले लो और जो देना है दे दो, मैं गुलाम सही तेरा, तूं सिकंदर सही जाना होगा खाली हाथ, मुझे भी, तूझे भी।