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केन्द्र सरकार के कार्यालयों विश्वविद्यालयों कालेजों के लिए आयोजित की जाने वाली हिंदी कार्यशाला के लिए भाषण मैटर / matter for hindi workshop

  हिंदी का महत्वः- माननीय (कार्यालय अध्यक्ष) तथा अन्य अधिकारीगण ! और कार्यालय के मेरे सभी साथियों ! आज की हिंदी कार्यशाला में आप   सभी का स्वागत है। हिंदी कार्यशाला का मुख्य विषय हिंदी की मानक वर्तनी/स्टैंडर्ड स्पेलिंग के बारे में है।   मैं आपको बताना चाहता हूँ कि हिंदी जानने वाले पदधारियों(ओफिशियल्स) के लिए हिंदी कार्यशालाओं का आयोजन, हिंदी में कार्य करने की उनकी झिझक को दूर करने के लिए किया जाता है। आपको पता ही है कि देवनागरी लिपि में लिखित हिंदी को 14 सितम्बर, 1949 को भारत के संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया। तो फिर हिंदी में कार्य करने में झिझक क्यूं होती है ? इसका एकमात्र कारण है कि हमारे मन में, अपने राष्ट्र और देश के संविधान के प्रति अस्मिता यानी गर्व का भाव नहीं है। हालांकि 26 जनवरी या 15 अगस्त को दिखावे के लिए हम थोड़ा गर्व प्रदर्शित करते हैं। वास्तव में, हम अपने देश के प्रति गर्व को महसूस नहीं करते या फिर जब अपने देश यानि हमवतन लोगों के लिए कार्य करने का समय आता है तो हम अपनी सुविधा का अधिक ख्याल करते हैं। और ये सोचकर कि हिंदी में कार्य करना मुश...

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्‍याचार निवारण) अधिनियम, 1989

                अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्‍याचार निवारण) अधिनियम, 1989 1989 का संख्‍याक 33 (यथा-संशोधित) अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्‍याचार निवारण) अधिनियम, 1989 1989 का संख्‍याक 33 (यथा-संशोधित) (11 सितम्‍बर, 1989) अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के लोगों के विरुद्ध किए गए अत्‍याचारों के अपराधों के निवारण के लिए, इस प्रकार के अपराधों के मुदकमों के लिए [1] (विशेष न्‍यायालयों और अनन्‍य विशेष न्‍यायालयों) तथा इस प्रकार के अपराधों के पीड़ितों को राहत देने व पुनर्वास के लिए और उनसे जुड़े अथवा उनसे आनुषंगिक मामलों के लिए प्रावधान करने हेतु अधिनियम। भारत गणराज्‍य के चालीसवें वर्ष में संसद द्वारा निम्‍नलिखित रूप से यह अधिनियमित हो :- अध्‍याय I प्रारंभिक 1. संक्षिप्‍त नाम, विस्‍तार और प्रारंभ – (1) इस अधिनियम को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्‍याचार निवारण) अधिनियम, 1989 कहा जाएगा।    (2)   इसका विस्‍तार जम्‍मू और कश्‍मीर राज्‍य को छोड़कर संपूर्ण भारत तक रहेगा।...