दक्षिण भारतीय मंदिरों की आर्थिक गतिविधियां
मध्यकालीन दक्षिण भारतीय मन्दिर की आर्थिक गतिविधियां अठाहरवीं और उन्नीसवीं सदी में अंग्रेजों के नियंत्रण से पूर्व दक्षिण भारत की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था में मध्यकालीन दक्षिण भारतीय हिन्दू मन्दिरों का अत्यधिक आर्थिक महत्व था। वर्तमान अध्ययन आन्ध्र प्रदेश के वर्तमान चित्तूर जिले के तिरूपति में स्थित , और दक्षिण भारतीय मन्दिरों में सबसे महत्वपूर्ण , एक तीर्थ-मन्दिर श्री वेंकटेश्वर के लगभग 100 शिलालेखों के उद्धरणों पर किए गए कार्य का परिणाम है। ये शिलालेख मुख्यतया नौवीं से सोलहवीं शताब्दियों के हैं , इस प्रकार ये किसी भारतीय मन्दिर की मध्यकालीन सामग्री का सबसे उम्दा संग्रह हैं। तिरूपति के शिलालेखों का संबंध निश्चित रूप से भूमि और धन के धर्मदान से है और इसीलिए यह धार्मिक दान में प्राप्त निधियों के रूप में मन्दिर के पास रखी गई भूमि और धन की प्रकृति एवं उपयोगिता के विश्लेषण के लिए बहुत ही उपयोगी है। इस सामग्री से तमिल देश के अन्य हिस्सों से कर्मकाण्डों के रूपों को अपनाने के कारण मन्दिर के कर्...